न्यूजीलैंड में बड़ा बदलाव! अब हर 8वां बच्चा भारतीय मां से जन्म ले रहा, आंकड़ों ने सबको चौंकाया!
वेलिंगटन: न्यूजीलैंड से सामने आए नए जनसांख्यिकीय (डेमोग्राफिक) आंकड़ों ने दुनिया भर के शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा है। हाल में प्रस्तुत शोध के अनुसार, न्यूजीलैंड में जन्म लेने वाले बच्चों में भारतीय मूल की माताओं की हिस्सेदारी पिछले डेढ़ दशक में तेजी से बढ़ी है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2008 में जहां कुल जन्मों में भारतीय माताओं की हिस्सेदारी लगभग 2.8 प्रतिशत थी, वहीं वर्ष 2024 तक यह बढ़कर 12.6 प्रतिशत हो गई। यानी औसतन हर आठवां नवजात ऐसे परिवार से जुड़ा है, जहां मां भारतीय मूल की है। यह आंकड़े न्यूजीलैंड में आयोजित न्यूजीलैंड पॉपुलेशन कॉन्फ्रेंस 2025 में प्रस्तुत शोध और जन्म पंजीकरण (Birth Registration) के विश्लेषण से जुड़े बताए गए हैं।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इन आंकड़ों को केवल जनसंख्या परिवर्तन के संदर्भ में समझा जाना चाहिए। इसका अर्थ यह नहीं है कि न्यूजीलैंड की कुल आबादी का हर आठवां व्यक्ति भारतीय है, बल्कि यह केवल हाल के जन्मों में भारतीय मूल की माताओं की हिस्सेदारी को दर्शाता है।
कैसे बढ़ा भारतीय माताओं का प्रतिशत?
आंकड़ों के अनुसार भारतीय मूल की माताओं की हिस्सेदारी लगातार बढ़ती रही है।
वर्ष 2008: 2.8%
वर्ष 2012: 3.5%
वर्ष 2016: 5.5%
वर्ष 2020: 7.9%
वर्ष 2024: 12.6%
इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि पिछले लगभग 16 वर्षों में यह हिस्सा चार गुना से भी अधिक बढ़ गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव अचानक नहीं हुआ, बल्कि लंबे समय से चल रहे प्रवासन (Migration) और भारतीय समुदाय की बढ़ती आबादी का परिणाम है।
जब कुल जन्म दर घट रही है, तब भी बढ़ा भारतीय समुदाय का योगदान
दिलचस्प बात यह है कि न्यूजीलैंड में पिछले कुछ वर्षों से कुल प्रजनन दर (Total Fertility Rate) में गिरावट दर्ज की गई है।
इसके बावजूद भारतीय मूल के परिवारों में जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या लगातार बढ़ी है।
जनसांख्यिकी विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव मुख्य रूप से भारतीय प्रवासियों की बढ़ती संख्या और उनकी अपेक्षाकृत युवा आयु संरचना के कारण देखने को मिला है।
यानी जहां न्यूजीलैंड की मूल आबादी की औसत आयु बढ़ रही है, वहीं भारत से पहुंचे अधिकांश प्रवासी युवा आयु वर्ग के हैं और परिवार स्थापित कर रहे हैं।
आखिर क्यों बढ़ रही है भारतीय समुदाय की संख्या?
शोधकर्ताओं के अनुसार इसके पीछे कई प्रमुख कारण हैं।
1. लगातार बढ़ा प्रवासन
पिछले दो दशकों में भारत न्यूजीलैंड के लिए प्रमुख प्रवासी देशों में शामिल हो चुका है।
शिक्षा, रोजगार और बेहतर जीवन स्तर की तलाश में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक न्यूजीलैंड पहुंचे हैं।
2. युवा आबादी
भारत से न्यूजीलैंड जाने वाले अधिकांश लोग 20 से 40 वर्ष की आयु के बीच होते हैं।
यह वही आयु वर्ग है जिसमें परिवार बसाने और बच्चों के जन्म की संभावना अधिक रहती है।
3. स्थायी बसावट
शुरुआत में पढ़ाई या नौकरी के लिए पहुंचे कई भारतीय बाद में वहीं स्थायी रूप से बस गए।
इसके बाद उन्होंने अपने परिवार की शुरुआत की, जिससे जन्म दर में भारतीय समुदाय का योगदान बढ़ता गया।
किन शहरों में सबसे अधिक भारतीय समुदाय?
विशेषज्ञों के अनुसार न्यूजीलैंड के कई बड़े शहर भारतीय समुदाय के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं।
इनमें शामिल हैं—
ऑकलैंड
हैमिल्टन
वेलिंगटन
क्राइस्टचर्च
इन शहरों में भारतीय मूल के परिवारों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
शिक्षा और रोजगार बने सबसे बड़े कारण
न्यूजीलैंड लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय छात्रों और कुशल पेशेवरों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है।
भारतीय छात्रों की बड़ी संख्या उच्च शिक्षा के लिए न्यूजीलैंड पहुंचती है।
इसके अलावा आईटी, स्वास्थ्य सेवाएं, इंजीनियरिंग, निर्माण, बैंकिंग और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में भी भारतीय पेशेवर बड़ी संख्या में कार्यरत हैं।
इन्हीं कारणों से भारतीय समुदाय का विस्तार लगातार होता गया।
अर्थव्यवस्था में भी बढ़ा योगदान
विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय समुदाय केवल जनसंख्या वृद्धि तक सीमित नहीं है।
व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीक और सेवा क्षेत्र में भी भारतीय मूल के लोग न्यूजीलैंड की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
कई भारतीय उद्यमियों ने वहां छोटे और मध्यम स्तर के व्यवसाय भी स्थापित किए हैं।
सामाजिक बदलाव भी दिखाई दे रहे हैं
भारतीय समुदाय के विस्तार के साथ-साथ न्यूजीलैंड के सामाजिक और सांस्कृतिक परिदृश्य में भी बदलाव देखने को मिल रहा है।
भारतीय त्योहारों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और पारंपरिक भोजन की लोकप्रियता पहले की तुलना में काफी बढ़ी है।
कई शहरों में भारतीय सांस्कृतिक संगठनों की गतिविधियां भी लगातार बढ़ रही हैं।
विशेषज्ञों की क्या राय है?
जनसंख्या विशेषज्ञों का मानना है कि विकसित देशों में कम होती जन्म दर के बीच प्रवासन जनसंख्या संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
न्यूजीलैंड भी उन देशों में शामिल है जहां अंतरराष्ट्रीय प्रवासन भविष्य की जनसंख्या संरचना को प्रभावित कर रहा है।
विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि भारतीय समुदाय की बढ़ती हिस्सेदारी मुख्य रूप से प्रवासन और युवा आबादी का परिणाम है, न कि किसी असामान्य जन्म दर का।
आगे क्या हो सकता है?
यदि वर्तमान प्रवासन और बसावट का रुझान जारी रहता है, तो आने वाले वर्षों में न्यूजीलैंड में भारतीय मूल के परिवारों की संख्या और बढ़ सकती है।
हालांकि भविष्य के आंकड़े सरकार की आव्रजन नीति, रोजगार के अवसरों, आर्थिक परिस्थितियों और जनसंख्या रुझानों पर निर्भर करेंगे।
न्यूजीलैंड में भारतीय समुदाय का बढ़ता योगदान केवल एक सांख्यिकीय बदलाव नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक जनसांख्यिकी का संकेत भी है। वर्ष 2008 से 2024 के बीच भारतीय मूल की माताओं की हिस्सेदारी में हुई उल्लेखनीय वृद्धि यह दर्शाती है कि प्रवासन, शिक्षा और रोजगार के अवसर किस तरह किसी देश की आबादी की संरचना को बदल सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भी यह रुझान न्यूजीलैंड की सामाजिक और आर्थिक तस्वीर को प्रभावित करता रह सकता है।

कोई टिप्पणी नहीं